उर्दू शायरी · ग़ज़ल

palkon par hasrat ki ghaTaen hum bhi pagal tum bhi

पलकों पर हसरत की घटाएँ हम भी पागल तुम भी

پلکوں پر حسرت کی گھٹائیں ہم بھی پاگل تم بھی

शायर: Mahboob Khizan4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पलकों पर हसरत की घटाएँ हम भी पागल तुम भी
जी न सकें और मरते जाएँ हम भी पागल तुम भी

दोनों अपनी आन के सच्चे दोनों अक़्ल के अंधे
हाथ बढ़ाएँ फिर हट जाएँ हम भी पागल तुम भी

ख़्वाब में जैसे जान छुड़ा कर भाग न सकने वाले
भागें और वहीं रह जाएँ हम भी पागल तुम भी

संदल फूले जंगल जागे नाग फिरीं मतवाले
नंगे पाँव चलें घबराएँ हम भी पागल तुम भी