उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har baat yahan baat baDhane ke liye hai

हर बात यहाँ बात बढ़ाने के लिए है

ہر بات یہاں بات بڑھانے کے لیے ہے

शायर: Mahboob Khizan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर बात यहाँ बात बढ़ाने के लिए है
ये उम्र जो धोका है तो खाने के लिए है

ये दामन-ए-हसरत है वही ख़्वाब-ए-गुरेज़ाँ
जो अपने लिए है न ज़माने के लिए है

उतरे हुए चेहरे में शिकायत है किसी की
रूठी हुई रंगत है मनाने के लिए है

ग़ाफ़िल तिरी आँखों का मुक़द्दर है अँधेरा
ये फ़र्श तो राहों में बिछाने के लिए है

घबरा न सितम से न करम से न अदा से
हर मोड़ यहाँ राह दिखाने के लिए है