उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chahi thi dil ne tujhse wafa kam bahut hi kam

चाही थी दिल ने तुझ से वफ़ा कम बहुत ही कम

چاہی تھی دل نے تجھ سے وفا کم بہت ہی کم

शायर: Mahboob Khizan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चाही थी दिल ने तुझ से वफ़ा कम बहुत ही कम
शायद इसी लिए है गिला कम बहुत ही कम

क्या हुस्न था कि आँख लगी साया हो गया
वो सादगी की मार, हया कम बहुत ही कम

थे दूसरे भी तेरी मोहब्बत के आस-पास
दिल को मगर सुकून मिला कम बहुत ही कम

जलते सुना चराग़ से दामन हज़ार बार
दामन से कब चराग़ जला कम बहुत ही कम

अब रूह काँपती है अजल है क़रीब-तर
ऐ हम-नसीब नाज़-ओ-अदा कम बहुत ही कम

यूँ मत कहो 'ख़िज़ाँ' कि बहुत देर हो गई
हैं आज-कल वो तुम से ख़फ़ा कम बहुत ही कम