उर्दू शायरी · ग़ज़ल

panw be-dhyani mein aisa paD gaya

पाँव बे-ध्यानी में ऐसा पड़ गया

پاؤں بے دھیانی میں ایسا پڑ گیا

शायर: Paras Mazari5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पाँव बे-ध्यानी में ऐसा पड़ गया
सब के किरदारों तलक कीचड़ गया

क्या हुआ जो ओक भर ली झील से
क्या हुआ जो एक पत्ता झड़ गया

दिल में आप आए तो निकले कितने लोग
च्यूँटियों के बिल में पानी पड़ गया

किस ने चूमी है मिरी मुफ़्लिस जबीं
कौन इतने महँगे मोती जड़ गया

वो अगर ज़िद्दी है तो होती रहे
मैं भी 'पारस' उड़ गया तो उड़ गया