उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya aziyyat hai mard hone ki

क्या अज़िय्यत है मर्द होने की

کیا اذیت ہے مرد ہونے کی

शायर: Paras Mazari6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या अज़िय्यत है मर्द होने की
कोई भी जा नहीं है रोने की

दायरा क़ैद की अलामत है
चाहे अँगूठी पहनो सोने की

साँस फूंकी गई बड़ा एहसान
चाबी भर दी गई खिलौने की

ऐसी सर्दी में शर्त चादर है
ओढ़ने की हो या बिछौने की

बोझ जैसा था जिस का था मुझे क्या
मुझे उजरत मिली है ढोने की

मैं जज़ीरे डुबोने वाला हूँ
ख़ू नहीं कश्तियाँ डुबोने की