उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kitni dafa na jaane di dastak

कितनी दफ़ा' न जाने दी दस्तक

کتنی دفعہ نہ جانے دی دستک

शायर: Paras Mazari6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कितनी दफ़ा' न जाने दी दस्तक
आख़िरी बार तीसरी दस्तक

पटरियों में फँसा हुआ पाँव
और गाड़ी की आ पड़ी दस्तक

तुम ने छुपने ही कब दिया मुझ को
तुम ने गिनती नहीं गिनी दस तक

सच में आने पे हो तुम आमादा
दी गई है कि हो गई दस्तक

गोल की गोल ही रही दुनिया
फिर वही दर है फिर वही दस्तक

तीनों दुश्मन हैं मेरे ख़्वाबों के
ये मिरे दोस्त आगही दस्तक