उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nikharna aql-o-KHirad ka agar zaruri hai

निखरना अक़्ल-ओ-ख़िरद का अगर ज़रूरी है

نکھرنا عقل و خرد کا اگر ضروری ہے

शायर: Obaidur Rahman6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

निखरना अक़्ल-ओ-ख़िरद का अगर ज़रूरी है
जुनूँ की राहबरी में सफ़र ज़रूरी है

हक़ीक़तों से जो होता है आश्ना ऐ दोस्त
तो इस के वास्ते राह-ए-ख़तर ज़रूरी है

किसी की नीची नज़र का सलाम साथ रहे
सफ़र के वास्ते ज़ाद-ए-सफ़र ज़रूरी है

मगर ये शर्त है हर लफ़्ज़ रूह से निकले
दुअा-ए-नीम-शबी में असर ज़रूरी है

दिलों का हाल न चेहरों से हो सके ज़ाहिर
ख़िरद के दौर में ये भी हुनर ज़रूरी है

'उबैद' दूसरों को कर चुके बहुत तल्क़ीन
अब अपने आप पे भी इक नज़र ज़रूरी है