उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nind ka ras faza mein gholo ho

नींद का रस फ़ज़ा में घोलो हो

نیند کا رس فضا میں گھولو ہو

शायर: Tabish Mehdi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नींद का रस फ़ज़ा में घोलो हो
ऐ मियाँ क्या ज़बान बोलो हो

मेरे हालात पर हैं तन्क़ीदें
तुम कभी ख़ुद को भी टटोलो हो

आह फ़रियाद नाला-ओ-शेवन
ऐसे 'आलम में कैसे सो लो हो

ये बताओ कि याद में उस की
तुम भी दामन कभी भिगो लो हो

रुख़ हवा का जिधर को होता है
क्यों उसी सम्त तुम भी हो लो हो

ग़म की शिद्दत है मौत का सामाँ
तुम ये अच्छा करो हो रो लो हो