उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nasim-e-subh pareshan hai dekhiye kya ho

नसीम-ए-सुब्ह परेशाँ है देखिए क्या हो

نسیم صبح پریشاں ہے دیکھیے کیا ہو

शायर: Zafar Naseemi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नसीम-ए-सुब्ह परेशाँ है देखिए क्या हो
ख़िज़ाँ की ज़द में गुलिस्ताँ है देखिए क्या हो

गुलाब ज़र्द हुआ लाला दाग़-दार हुआ
शगूफ़ा ख़ौफ़ से लर्ज़ां है देखिए क्या हो

इरादा वहशत-ओ-ग़ारत-गरी है ज़ालिम का
निशाना शहर-ए-निगाराँ है देखिए क्या हो

वो अब्र जिस के बरसने से फूल खिलते थे
वो आज शो'ला-ब-दामाँ है देखिए क्या हो

लगी हैं यारों की आँखें नए हवादिस पर
हर एक आइना हैराँ है देखिए क्या हो

सभी रफ़ीक़-ओ-शफ़ीक़ आज छूटे जाते हैं
बदन से रूह गुरेज़ाँ है देखिए क्या हो

ग़म-ए-हयात से मुमकिन नहीं मफ़र लेकिन
नजात मिलने का इम्काँ है देखिए क्या हो