उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nasihat ki kitabon ke bina hain

नसीहत की किताबों के बिना हैं

نصیحت کی کتابوں کے بنا ہیں (ردیف .. ے)

शायर: Yawar Ali6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नसीहत की किताबों के बिना हैं
हज़ारों लोग अपनों के बिना हैं

तुम्हें अफ़्सोस है जूते नहीं हैं
बहुत से लोग पैरों के बिना हैं

सभी के घर नहीं रौशन दियों से
बहुत से लोग बच्चों के बिना हैं

यतीमों के बुझे चेहरे तो देखो
सितारे आसमानों के बिना हैं

ग़रीबी जिन का सूरज खा गई है
वो बेबस दिल उजालों के बिना हैं

कफ़न को ओढ़ कर सोते हैं बे-घर
कहाँ फ़ुट-पाथ ख़तरों के बिना है