उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghazal hai qafiyon se qafiye hain jaan ghazlon ki

ग़ज़ल है क़ाफ़ियों से क़ाफ़िए हैं जान ग़ज़लों की

غزل ہے قافیوں سے قافیے ہیں جان غزلوں کی

शायर: Yawar Ali7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़ज़ल है क़ाफ़ियों से क़ाफ़िए हैं जान ग़ज़लों की
बिना इन के गली हो जाएगी वीरान ग़ज़लों की

कहीं मतला' कहीं मक़्ता' कहीं आता तख़ल्लुस है
बढ़ाते हैं ये सब बज़्म-ए-अदब में शान ग़ज़लों की

कई सिंफ़ें हैं जैसे गीत दोहे सोरठा नज़्में
अलग ही है मगर साहित्य में पहचान ग़ज़लों की

रदीफ़ों को मनाओ गर क़वाफ़ी रूठ जाते हैं
बड़ी मुश्किल से बनती है सुरीली तान ग़ज़लों की

ख़ुशी का दर्द का ये हो कोई मौज़ू' दुनिया का
सहारा है बनी सब के लिए दूकान ग़ज़लों की

बहुत से इंक़िलाबों में इन्हों ने जान फूंकी है
तुम्हें क्या क्या बताएँ ख़ूबियाँ बे-जान ग़ज़लों की

बड़ी मुश्किल से होती है मुकम्मल इक ग़ज़ल 'यावर'
मियाँ है राह इतनी भी नहीं आसान ग़ज़लों की