उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nahin bologe han hun to rawani TuT jaegi

नहीं बोलोगे हाँ हूँ तो रवानी टूट जाएगी

نہیں بولو گے ہاں ہوں تو روانی ٹوٹ جائے گی

शायर: Ekhlaq Ahmad Ekhlaq8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नहीं बोलोगे हाँ हूँ तो रवानी टूट जाएगी
अगर तुम सो गए मेरी कहानी टूट जाएगी

ख़ुदा के वास्ते मेरे उसूलों से न खेलो तुम
यही इक है बुज़ुर्गों की निशानी टूट जाएगी

बहुत मग़रूर है दरिया अभी अपनी जवानी पर
समंदर में उतरते ही रवानी टूट जाएगी

हमारी ज़िंदगी है इक पतंग और मौत आँधी है
बहुत कमज़ोर है साँसों की तानी टूट जाएगी

सभी मध-मक्खियों को मारने की क्या ज़रूरत है
वो ख़ुद ही हार जाएँगी जो रानी टूट जाएगी

ज़ियादा दिल की लॉरी में ग़मों का बोझ मत लादो
मिरे सब्र-ओ-तहम्मुल की कमानी टूट जाएगी

ग़लत राहों की लज़्ज़त से ज़रा बच कर निकल वर्ना
जवानी आने से पहले जवानी टूट जाएगी

उन्हें ले कर मुझे 'अख़लाक़' शॉपिंग मॉल जाना है
नहीं जाऊँगा तो सिंगार-दानी टूट जाएगी