उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nafrat ki aag jalne lagi tere shahr mein

नफ़रत की आग जलने लगी तेरे शहर में

نفرت کی آگ جلنے لگی تیرے شہر میں

शायर: Pallavi Mishra7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नफ़रत की आग जलने लगी तेरे शहर में
ये बात आज खलने लगी तेरे शहर में

जो आश्ना थे कल मिरे सब गुम कहाँ हुए
हिजरत की चाह पलने लगी तेरे शहर में

मरने का मारने का ये क्या दौर आ गया
जीने की आस टलने लगी तेरे शहर में

मेरा यहाँ से ठोर-ठिकाना उजड़ गया
आँधी अजीब चलने लगी तेरे शहर में

हर दिल में कौन भरने लगा दुश्मनी यहाँ
शफ़क़त भी हाथ मलने लगी तेरे शहर में

क़ुदरत ख़फ़ा हुई न कहीं लाए ज़लज़ला
करवट ज़मीं बदलने लगी तेरे शहर में

काली घटा की क़ैद में वो कब तलक रहे
अब चाँदनी मचलने लगी तेरे शहर में