उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nadi ki naw ki ya hauslon ki

नदी की नाव की या हौसलों की

ندی کی ناؤ کی یا حوصلوں کی

शायर: Madho Kaushik5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नदी की नाव की या हौसलों की
कहानी तो सुनाओ दिल-जलों की

जहाँ पर रास्ता गुम हो गया था
वहीं से राह निकली मंज़िलों की

मेरी आँखों से आँसू बह रहे हैं
सुनी थी चीख़ मैं ने घायलों की

समुंदर को नज़र आए न आए
उदासी कम नहीं है साहिलों की

कभी फ़ुर्सत मिले तो पूछ लेना
बहुत मुश्किल है बातें मुश्किलों की