उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi rishta purana ho gaya hai

कोई रिश्ता पुराना हो गया है

کوئی رشتہ پرانا ہو گیا ہے

शायर: Madho Kaushik6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई रिश्ता पुराना हो गया है
तुम्हें देखे ज़माना हो गया है

तुम्हारी याद आते ही ज़ह्न में
बुरा मौसम सुहाना हो गया है

हवा की बे-हयाई क्या बताएँ
बहुत मुश्किल ज़माना हो गया है

लबों को खोलना भी जुर्म ठहरा
मुसीबत मुस्कुराना हो गया है

हमारे शहर का माहौल एक-दम
बिगड़ कर क़ातिलाना हो गया है

ये कैसे मोड़ पर ले आई दुनिया
हक़ीक़त का फ़साना हो गया है