उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har lamha begana hai

हर लम्हा बेगाना है

ہر لمحہ بیگانہ ہے

शायर: Madho Kaushik8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर लम्हा बेगाना है
पर कसने पहचाना है

जिसे मौत सब कहते हैं
धड़कन का रुक जाना है

मैं क्या मेरा मैं भी क्या
केवल आब-ओ-दाना है

दुनिया सब कुछ समझ आई
बस ख़ुद को समझाना है

झूटी तारीख़ें मत देख
झूटा आना जाना है

मैं तुझ से मायूस नहीं
तू मेरा अफ़्साना है

जीवन की सच्चाई क्या
हर पल धोका खाना है

इस महफ़िल से क्या रिश्ता
रोना है ना गाना है