उर्दू शायरी · ग़ज़ल

naz kar naz ki ye naz juda hai sab se

नाज़ कर नाज़ कि ये नाज़ जुदा है सब से

ناز کر ناز کہ یہ ناز جدا ہے سب سے

शायर: Ummeed Fazli7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नाज़ कर नाज़ कि ये नाज़ जुदा है सब से
मेरा लहजा मिरी आवाज़ जुदा है सब से

जुज़ मोहब्बत किसे मालूम कि वो चश्म-ए-हया
बात तो करती है अंदाज़ जुदा है सब से

जिस को भी मार दिया ज़िंदा-ए-जावेद किया
हर्फ़-ए-हक़ तेरा ये ए'जाज़ जुदा है सब से

देखना कौन है क्या उस को नहीं जान-ए-अज़ीज़
सर-ए-दरबार इक आवाज़ जुदा है सब से

टूट जाता है तो सुर और भी लौ देते हैं
दिल जिसे कहते हैं वो साज़ जुदा है सब से

सोच कर दाम बिछाना ज़रा ऐ मौज-ए-हवा
मेरे इंकार की परवाज़ जुदा है सब से

नश्शा-ए-दहर-ओ-क़यामत का तो क्या ज़िक्र 'उमीद'
वो मिरा सर्व-ए-सर-अफ़राज़ जुदा है सब से