उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nam batata hai apna ‘ikram-saba

नाम बताता है अपना ‘इकराम-सबा'

نام بتاتا ہے اپنا اکرام صباؔ

शायर: Saba Ikram5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नाम बताता है अपना ‘इकराम-सबा'
पूछ लो जा कर ढूँढता है वो किस का पता

धूप में उस का जब कोमल पर जलने लगा
ध्यान का पंछी शाख़-ए-शजर पे लौट आया

रैक में रक्खी रक्खी पुस्तक ख़त्म हुई
दिल को समय का दीमक आख़िर चाट गया

सीने की घनघोर घटा बरसी आँखों से
दिल का भेद ऊँची दीवारें फाँद गया

घूरता अपने घर की तरफ़ पाया उस को
खिड़की के पर्दे को हटा कर जब झाँका