उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na talafiyan hi mangen na wafa na pyar mangen

न तलाफ़ियाँ ही माँगें न वफ़ा न प्यार माँगें

نہ تلافیاں ہی مانگیں نہ وفا نہ پیار مانگیں

शायर: R P Shokh5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न तलाफ़ियाँ ही माँगें न वफ़ा न प्यार माँगें
चलो आज उस से खोया हुआ ए'तिबार माँगें

तिरे शहर में हमेशा यही क़िल्लतें सही हैं
कभी उस से तौक़ माँगें कभी उस से दाद माँगें

तिरे अहद में न जीना तिरे अहद में न मरना
हमें इख़्तियार हो तो कोई इख़्तियार माँगें

तिरी बे-रुख़ी के सदक़े तिरी बे-रुख़ी नहीं है
यही तो है वो अदा जो तिरे जाँ-निसार माँगें

कहीं यूँ न हो कि कल हम ग़म-ए-यार से भी जाएँ
चलो आ रही रुतों से वही इंतिज़ार माँगें