उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na kar dil-jui ai sayyaad meri

न कर दिल-जूई ऐ सय्याद मेरी

نہ کر دل جوئی اے صیاد میری

शायर: Hafeez Jalandhari10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न कर दिल-जूई ऐ सय्याद मेरी
कि फ़ितरत है बहुत आज़ाद मेरी

असीरी से रिहाई पाने वालो
तुम्हें पहुँचे मुबारकबाद मेरी

सहारा क्यूँ लिया था नाख़ुदा का
ख़ुदा भी क्यूँ करे इमदाद मेरी

भुला दो मुझ को लेकिन याद रखना
सताएगी तुम्हें भी याद मेरी

फ़रिश्ते क्या मुरत्तब कर सकेंगे
बहुत बे-रब्त है रूदाद मेरी

पसंद आने लगी थी सर-बुलंदी
यही थी अव्वलीं उफ़्ताद मेरी

किया पाबंद-ए-नय नाले को मैं ने
ये तर्ज़-ए-ख़ास है ईजाद मेरी

मिरे अशआ'र पर चुप रहने वाले
तिरे हिस्से में आई दाद मेरी

क़ज़ा का ज़ुल्म हद से बढ़ गया है
कोई सुनता नहीं फ़रियाद मेरी

ख़ुदावंदा क़ज़ा ने छीन ली है
मिरे आग़ोश से 'इरशाद' मेरी