उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na kaho tum bhi kuchh na hum bolen

न कहो तुम भी कुछ न हम बोलें

نہ کہو تم بھی کچھ نہ ہم بولیں

शायर: Zafar Tabish5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न कहो तुम भी कुछ न हम बोलें
आओ ख़ामोशियों के लब खोलें

बस्तियाँ हम ख़ुद ही जला आए
किसी बरगद के साए में सो लें

कुछ नए रंग सामने आएँ
आ कई रंग साथ में घोलें

ज़र्द मंज़र अजीब सन्नाटे
खिड़कियाँ क्यूँ घरों की हम खोलें

रास्ते सहल हैं मगर 'ताबिश'
कौन है साथ जिस के हम हो लें