उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na-jaane kis ki dua hai ki kaam chal raha hai

न-जाने किस की दु'आ है कि काम चल रहा है

نجانے کس کی دعا ہے کہ کام چل رہا ہے

शायर: Jabbar Wasif8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न-जाने किस की दु'आ है कि काम चल रहा है
कोई निज़ाम नहीं और निज़ाम चल रहा है

रह-ए-वफ़ा में बिछे हैं जफ़ा के अंगारे
जो चल रहा है वो दो-चार गाम चल रहा है

कई अदीबों के नामर्द हो चुके हैं क़लम
कई बरस से फ़क़त उन का नाम चल रहा है

ख़बर मिली है कि आक़ा-परस्त बस्ती में
किसी के पीछे किसी का ग़ुलाम चल रहा है

जो खा चुका है हमारे शकेब और सर्वत
सुख़न-कदों में वही हर्फ़-ए-ख़ाम चल रहा है

मैं जानता हूँ जो ना-शा’इरों की है क़ीमत
मैं जानता हूँ जो इन सब का दाम चल रहा है

है सब्त मुहर-ए-सिफ़ारिश हसीन जिस्मों पर
अदब की मंडी में माल-ए-हराम चल रहा है

तुझे ख़बर नहीं 'वासिफ़' बदन के सिक्के की
ऐ मेरे दोस्त ये सिक्का तो 'आम चल रहा है