उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dar shamil ho aur diwar mulawwis ho

दर शामिल हो और दीवार मुलव्विस हो

در شامل ہو اور دیوار ملوث ہو

शायर: Jabbar Wasif11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दर शामिल हो और दीवार मुलव्विस हो
या'नी यार की हार में यार मुलव्विस हो

उस चोरी से बचना मुश्किल होता है
जिस चोरी में चौकीदार मुलव्विस हो

टीपू सा सुलतान भी जीत नहीं सकता
ग़द्र में जब कोई ग़द्दार मुलव्विस हो

सोचिए फिर अंजाम क़बीले वालों का
जब साज़िश में ख़ुद सरदार मुलव्विस हो

लश्कर का फिर पसपा होना बनता है
पसपाई में जब सालार मुलव्विस हो

उस उस जुर्म की फ़ाइल मख़्फ़ी रहती है
जिस जिस में ख़ुफ़िया किरदार मुलव्विस हो

'अद्ल के कारोबार को कोई क्या रोके
जब उस में सारी सरकार मुलव्विस हो

ज़ाहिर में क़ाज़ी ता'ज़ीर लगाए और
दर-पर्दा शाही दरबार मुलव्विस हो

दोस्त हमारे दोस्त हैं पर क्या लाज़िम है
क़त्ल में दुश्मन ही हर बार मुलव्विस हो

मुमकिन है उस पार का हाथ न हो इस बार
मुमकिन है कोई इस पार मुलव्विस हो

'वासिफ़' ख़्वाहिश है कि बस्ती हो बेदार
और बेदारी में ‘जब्बार’ मुलव्विस हो