उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na chheD nam-o-nasab aur nasl-o-rang ki baat

न छेड़ नाम-ओ-नसब और नस्ल-ओ-रंग की बात

نہ چھیڑ نام و نسب اور نسل و رنگ کی بات

शायर: Zafar Naseemi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न छेड़ नाम-ओ-नसब और नस्ल-ओ-रंग की बात
कि चल निकलती है अक्सर यहीं से जंग की बात

तुम्हारे शहर में किस किस को आइना दिखलाएँ
हज़ार तरह के चेहरे हज़ार रंग की बात

हर एक बात पे ता'ना हर एक बात पे तंज़
कभी तो यार किया कर किसी से ढंग की बात

मैं उस के वा'दा-ए-फ़र्दा पे क्या यक़ीं करता
हँसी में टाल गया एक शोख़-ओ-शंग की बात

उठा है संग-ए-मलामत ब-नाम-ए-शीशा-ए-दिल
क़रार पाई है शीशे के साथ संग की बात

अजीब हाल है यारों की बे-हिसी का 'ज़फ़र'
सुकूत-ए-मर्ग का आलम रबाब-ओ-चंग की बात