उर्दू शायरी · ग़ज़ल

musalsal mujh pe ye teri inayat mar Dalegi

मुसलसल मुझ पे ये तेरी इनायत मार डालेगी

مسلسل مجھ پہ یہ تیری عنایت مار ڈالے گی

शायर: Sabihuddin Shoaiby5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुसलसल मुझ पे ये तेरी इनायत मार डालेगी
कभी फ़ुर्क़त कभी इस दर्जा क़ुर्बत मार डालेगी

ग़रीब-ए-शहर का क्या इस को ग़ुर्बत मार डालेगी
अमीर-ए-शहर को दौलत की चाहत मार डालेगी

सड़क पर पाया जाएगा किसी दिन मेरा भी लाशा
मुझे सच बोलते रहने की आदत मार डालेगी

ये तेरी दस्त-गीरी एक दिन ले डूबेगी मुझ को
मिरी हर बात पर तेरी हिमायत मार डालेगी

अगर चाहत की शिद्दत दिन-ब-दिन बढ़ती रही यूँ ही
'सबीह'-ए-नीम-जाँ तुझ को मोहब्बत मार डालेगी