उर्दू शायरी · ग़ज़ल

muraden koi pata hai kisi ki jaan jati hai

मुरादें कोई पाता है किसी की जान जाती है

مرادیں کوئی پاتا ہے کسی کی جان جاتی ہے (ردیف .. ن)

शायर: Zaheer Dehlvi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुरादें कोई पाता है किसी की जान जाती है
हज़ारों देखने वाले तिरी चितवन के बैठे हैं

अदू आशिक़ सही माना उसी पर मुनहसिर क्या है
अभी तो चाहने वाले बहुत बचपन के बैठे हैं

सबा क्या ख़ाक उड़ाएगी अदू क्या क़हर ढाएँगे
वो ख़ुद पामाल करने को मिरे मदफ़न के बैठे हैं

सुराग़-ए-नक़्श-ए-पा-ए-ग़ैर शायद अपना रहबर हो
सर-ए-राह-ए-तलब हम मुंतज़िर रहज़न के बैठे हैं