उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mumkin nahin hai jo yahan ha-hu nikal de

मुमकिन नहीं है जो यहाँ हा-हू निकाल दे

ممکن نہیں ہے جو یہاں ہا ہو نکال دے

शायर: Daniyal Zaman4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुमकिन नहीं है जो यहाँ हा-हू निकाल दे
इस मुश्त’इल हुजूम से आ तू निकाल दे

जो चश्म-ए-नीम-वा से सहर देखता रहा
वो शब के जाने कौन से पहलू निकाल दे

मैं छीनता हूँ रंग की वहशत गुलाब से
तू बाग़बाँ के हाथ से ख़ुशबू निकाल दे

क्या जानिए ले जाए वहाँ कौन सा फ़ुसूँ
महफ़िल से उस की कौन सा जादू निकाल दे