उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhe yaqin hai koi rasta to niklega

मुझे यक़ीं है कोई रास्ता तो निकलेगा

مجھے یقیں ہے کوئی راستہ تو نکلے گا

शायर: Chandrashekhar Pandey Shams8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझे यक़ीं है कोई रास्ता तो निकलेगा
अगर जो कुछ नहीं निकला ख़ुदा तो निकलेगा

मैं रेग-ज़ारों में दरिया तलाश करता हूँ
मिरी तलाश से इक सिलसिला तो निकलेगा

किताब-ए-ज़ीस्त के पन्ने पलट रहा हूँ मैं
किसी वरक़ से कोई फ़ल्सफ़ा तो निकलेगा

दिए दिखाते रहो दिन में ऐसे सूरज को
जो उस के दिल में अंधेरा हुआ तो निकलेगा

ये सोच कर के चमन में लगा दी आग उस ने
के इस में कोई परिंदा हुआ तो निकलेगा

सदाएँ देना मिरा काम है करूँगा मैं
कोई पहाड़ मिरा हम-नवा तो निकलेगा

मैं सारे शहर को ख़्वाबीदा छोड़ कर निकला
के आँख खुलने पे इक रहनुमा तो निकलेगा

चलो भी 'शम्स' उठो जुगनुओं की महफ़िल से
तुम्हारे बा'द कोई मुद्द'आ तो निकलेगा