उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baDh kar kisi se hath milane nahin gae

बढ़ कर किसी से हाथ मिलाने नहीं गए

بڑھ کر کسی سے ہاتھ ملانے نہیں گئے

शायर: Chandrashekhar Pandey Shams5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बढ़ कर किसी से हाथ मिलाने नहीं गए
तेवर वही हैं अब भी पुराने नहीं गए

दालान अपनी छान के बैठे तमाम उम्र
चक्कर किसी महल का लगाने नहीं गए

जब भी गए तो बैठ गए पाँव के तले
ग़लती से भी बड़ों के सिरहाने नहीं गए

महफ़िल में तेरी शोर है मेरे ही नाम का
जाने के बाद भी वो फ़साने नहीं गए

अपने हुनर से 'शम्स' थे जुगनू थे जो भी थे
फोटो किसी के साथ खिंचाने नहीं गए