उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jangalon mein jo KHuda titliyan mahfuz rakhe

जंगलों में जो ख़ुदा तितलियाँ महफ़ूज़ रखे

جنگلوں میں جو خدا تتلیاں محفوظ رکھے

शायर: Chandrashekhar Pandey Shams5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जंगलों में जो ख़ुदा तितलियाँ महफ़ूज़ रखे
तो ज़माने में वही लड़कियाँ महफ़ूज़ रखे

मैं ने इक फ़स्ल उगा रक्खी है दर्द-ए-दिल की
मेरी आँखों में क़ज़ा बदलियाँ महफ़ूज़ रखे

बादबाँ खोल दिया हम ने फ़लक को कह दो
आँधियाँ-वाँधियाँ ये बिजलियाँ महफ़ूज़ रखे

दश्त-ओ-सहरा में रखे 'इश्क़ को ज़िंदा जो वो
शहर के बीच में वीरानियाँ महफ़ूज़ रखे

जब क़फ़स दे ही दिया है मिरी क़िस्मत में तब
वहशत-ए-‘इश्क़ से ये तीलियाँ महफ़ूज़ रखे