उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhe shad rakhna ki nashad rakhna

मुझे शाद रखना कि नाशाद रखना

مجھے شاد رکھنا کہ ناشاد رکھنا

शायर: Hafeez Jalandhari8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझे शाद रखना कि नाशाद रखना
मिरे दीदा ओ दिल को आबाद रखना

भुलाई नहीं जा सकेंगी ये बातें
तुम्हें याद आएँगे हम याद रखना

वो नाशाद ओ बर्बाद रखते हैं मुझ को
इलाही उन्हें शाद ओ आबाद रखना

तुम्हें भी क़सम है कि जो सर झुका दे
उसी को तह-ए-तेग़-ए-बेदाद रखना

मिलेंगे तुम्हें राह में बुत-कदे भी
ज़रा अपने अल्लाह को याद रखना

जहाँ भी नशे में क़दम लड़खड़ाएँ
वहीं एक मस्जिद की बुनियाद रखना

सितारों पे चलते हुए इब्न-ए-आदम
नज़र में फ़रिश्तों की उफ़्ताद रखना

'हफ़ीज़' अपने अफ़्कार की सादगी को
तकल्लुफ़ की उलझन से आज़ाद रखना