उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhko bhi haq hai zindagani ka

मुझ को भी हक़ है ज़िंदगानी का

مجھ کو بھی حق ہے زندگانی کا

शायर: Tahir Azeem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझ को भी हक़ है ज़िंदगानी का
मैं भी किरदार हूँ कहानी का

जो मुझे आज फिर नज़र आया
ख़्वाब है मेरी नौजवानी का

हम को दरपेश है ज़माने से
मसअला बख़्त की गिरानी का

क्यूँ निकलता नज़र नहीं आता
कुछ नतीजे भी ख़ुश-गुमानी का

कल जो सैलाब आ गया तू 'अज़ीम'
हम ने जाना मिज़ाज पानी का