उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat se junun ki dastan tak aa gaya hun main

मोहब्बत से जुनूँ की दास्ताँ तक आ गया हूँ मैं

محبت سے جنوں کی داستاں تک آ گیا ہوں میں

शायर: Balbir Rathi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत से जुनूँ की दास्ताँ तक आ गया हूँ मैं
किसी के 'इश्क़ में देखो कहाँ तक आ गया हूँ मैं

ये राहें ख़ुद-बख़ुद कैसे मुनव्वर हो उठीं या-रब
गुमाँ होता है मंज़िल के निशाँ तक आ गया हूँ मैं

किसे मा'लूम था जज़्बात ये भी रंग लाएँगे
जुनूँ में अब किसी के इम्तिहाँ तक आ गया हूँ मैं

कभी इक दर्द बन कर सिर्फ़ उन के दिल में पिन्हाँ था
मगर अब गीत बन कर हर ज़बाँ तक आ गया हूँ मैं

नहीं वो बात ही कुछ और थी जिस की तमन्ना थी
यूँ ही जज़्बात की रौ में यहाँ तक आ गया हूँ मैं

तुम्हारी इन हसीं मख़मूर आँखों की क़सम हमदम
वहीं तक राह-ए-उल्फ़त है जहाँ तक आ गया हूँ मैं

कहीं मंज़िल से आगे ही न आ पहुँचा हूँ मैं यारो
ज़रा आवाज़ दो मुझ को कहाँ तक आ गया हूँ मैं

तमन्ना है उफ़ुक़ के धुँदले पर्दे चाक कर डालूँ
किसी की जुस्तुजू में अब यहाँ तक आ गया हूँ मैं