उर्दू शायरी · ग़ज़ल

go purani ho chuki wo hosh mein aane ki baat

गो पुरानी हो चुकी वो होश में आने की बात

گو پرانی ہو چکی وہ ہوش میں آنے کی بات

शायर: Balbir Rathi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गो पुरानी हो चुकी वो होश में आने की बात
लोग फिर भी कर रहे हैं मुझ को समझाने की बात

रफ़्ता-रफ़्ता ढल गई है सैंकड़ों नग़्मात में
ऐ दिल-ए-मा’सूम तेरे एक अफ़्साने की बात

अपना अपना ग़म लिए फिरते हैं इस दुनिया में लोग
कौन समझेगा यहाँ अब तेरे दीवाने की बात

ज़िंदगी उलझी हुई है और ही जंजाल में
अब कहाँ वो साग़र-ओ-मीना की मयख़ाने की बात

अजनबी माहौल में अपने तो लब खुलते नहीं
तुम ही छेड़ो आज उस रंगीन अफ़्साने की बात