उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamein sath mil to gaya tha kisi ka

हमें साथ मिल तो गया था किसी का

ہمیں ساتھ مل تو گیا تھا کسی کا

शायर: Balbir Rathi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमें साथ मिल तो गया था किसी का
मगर मुख़्तसर था सफ़र ज़िंदगी का

कहाँ आ गए हम भटकते भटकते
यहाँ तो निशाँ तक नहीं रौशनी का

तमद्दुन की ये कौनसी मंज़िलें हैं
कि दुश्मन हुआ आदमी आदमी का

वफ़ा एक मुद्दत हुई मिट चुकी है
कहाँ नाम लेते हो अब दोस्ती का

अगर साथ होते वो इन रास्तों पर
तो क्या हाल होता मिरी आगही का

मिरे हाल पर मुस्कुरा कर गए हैं
चलो हक़ अदा हो गया दोस्ती का