उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ata kar di kisi ne wo bala ki tishnagi mujhko

'अता कर दी किसी ने वो बला की तिश्नगी मुझ को

عطا کر دی کسی نے وہ بلا کی تشنگی مجھ کو

शायर: Balbir Rathi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'अता कर दी किसी ने वो बला की तिश्नगी मुझ को
न रास आएगी शायद ज़िंदगी-भर ज़िंदगी मुझ को

मिरी ये बेबसी तो ख़ैर कुछ ऐसी नहीं हमदम
मगर जीने नहीं देगी तिरी बेचारगी मुझ को

भला मैं रुत्बा-ए-दीवानगी का मुस्तहिक़ कब था
किसी के प्यार ने दे दी यूँही दीवानगी मुझ को

कोई मंज़िल भी हो वो मेरी मंज़िल हो नहीं सकती
अज़ल से ही मिली है बे-सबब आवारगी मुझ को

मुझे तो ज़िंदगी में बारहा महसूस होता है
मिरे मा'सूम ख़्वाबों ने ही दी है नग़मगी मुझ को