उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat chahiye baham hamein bhi ho tumhein bhi ho

मोहब्बत चाहिए बाहम हमें भी हो तुम्हें भी हो

محبت چاہیے باہم ہمیں بھی ہو تمہیں بھی ہو

शायर: Bahadur Shah Zafar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत चाहिए बाहम हमें भी हो तुम्हें भी हो
ख़ुशी हो इस में या हो ग़म हमें भी हो तुम्हें भी हो

ग़नीमत तुम इसे समझो कि इस ख़ुम-ख़ाने में यारो
नसीब इक-दम दिल-ए-ख़ुर्रम हमें भी हो तुम्हें भी हो

दिलाओ हज़रत-ए-दिल तुम न याद-ए-ख़त्त-ए-सब्ज़ उस का
कहीं ऐसा न हो ये सम हमें भी हो तुम्हें भी हो

हमेशा चाहता है दिल कि मिल कर कीजे मय-नोशी
मुयस्सर जाम-ए-मय जम-जम हमें भी हो तुम्हें भी हो

हम अपना 'इश्क़ चमकाएँ तुम अपना हुस्न चमकाओ
कि हैराँ देख कर 'आलम हमें भी हो तुम्हें भी हो

रहे हिर्स-ओ-हवा दाइम 'अज़ीज़ो साथ जब अपने
न क्यूँकर फ़िक्र-ए-बेश-ओ-कम हमें भी हो तुम्हें भी हो

'ज़फ़र' से कहता है मजनूँ कहीं दर्द-ए-दिल-ए-महज़ूँ
जो ग़म से फ़ुर्सत अब इक दम हमें भी हो तुम्हें भी हो