उर्दू शायरी · ग़ज़ल

miTTi ki surahi hai

मिट्टी की सुराही है

مٹی کی صراحی ہے

शायर: Aamir Suhail7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिट्टी की सुराही है
पानी की गवाही है

'उश्शाक़ नहीं हम लोग
पर रंग तो काही है

हर ग़ुंचा-ए-लब दरबाँ
हर शाख़ सिपाही है

सब्ज़े पे खिंचा नक़्शा
और सुर्ख़ सियाही है

इक साँवली पतझड़ के
पुश्ते पे तबाही है

उधड़ी हुई क़ब्रों पर
कत्बों की मनाही है

ऐ काँच की सी पिंडली
ये शहर-ए-सबा ही है