उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere wajud ko maujudgi dikhati thi

मिरे वजूद को मौजूदगी दिखाती थी

مرے وجود کو موجودگی دکھاتی تھی

शायर: Faizan Hashmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे वजूद को मौजूदगी दिखाती थी
दिए की लौ मुझे दीवार का बताती थी

मैं जब ज़मीन से ज़ोहरा पे जाया करता था
तू काएनात की ज़ंजीर खींची जाती थी

वो क्या किरन थी जो आती थी मेरे सीने में
तुम्हारी धूप जब इस जल्द तक न आती थी

मैं उस को ख़्वाब में कुछ ऐसे देखा करता था
तमाम रात वो सोते में मुस्कुराती थी

अजीब वक़्त था इस बेंच पर बग़ैचा में
कि दिन गया नहीं होता था रात आती थी