उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bas yahi soch ke rahta hun main zinda is mein

बस यही सोच के रहता हूँ मैं ज़िंदा इस में

بس یہی سوچ کے رہتا ہوں میں زندہ اس میں

शायर: Faizan Hashmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बस यही सोच के रहता हूँ मैं ज़िंदा इस में
ये मोहब्बत है कोई मर नहीं सकता इस में

ये भी दरवाज़ा है इस घर में इसे खोलें तो
रात खुल जाती है खुलता नहीं कमरा इस में

फूल तो फूल मैं पत्ती भी नहीं तोडूँगा
तुझ से साबित ही न होगा मिरा होना इस में

तू ने दो शख़्स उतारे थे ये मैं जानता हूँ
मैं ने भी शेर कहे हैं बहुत आला इस में

आख़िरी इश्क़ के आग़ाज़ पे दम तोड़ता हूँ
मैं कोई दम-दमा-दम-दम नहीं करता इस में