उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere labon pe usi aadmi ki pyas na ho

मिरे लबों पे उसी आदमी की प्यास न हो

مرے لبوں پہ اسی آدمی کی پیاس نہ ہو

शायर: Tahir Faraz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे लबों पे उसी आदमी की प्यास न हो
जो चाहता है मिरे सामने गिलास न हो

ये तिश्नगी तो मिली है हमें विरासत में
हमारे वास्ते दरिया कोई उदास न हो

तमाम दिन के दुखों का हिसाब करना है
मैं चाहता हूँ कोई मेरे आस-पास न हो

मुझे भी दुख है ख़ता हो गया निशाना तिरा
कमान खींच मैं हाज़िर हूँ तू उदास न हो

ग़ज़ल ही रह गई ताहिर-'फ़राज़' अपने लिए
जहान में कोई ऐसा भी बे-असास न हो