उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aadmi hun wasf-e-paighambar na mang

आदमी हूँ वस्फ़-ए-पैग़म्बर न माँग

آدمی ہوں وصف پیغمبر نہ مانگ

शायर: Tahir Faraz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आदमी हूँ वस्फ़-ए-पैग़म्बर न माँग
मुझ से मेरे दोस्त मेरा सर न माँग

ये तो मुमकिन है कि सर दे दें मगर
हम फ़क़ीरों से कोई पत्थर न माँग

ऐब में दाख़िल हो फ़नकारी जहाँ
वक़्त के पत्थर वहाँ आज़र न माँग

हो सके तो अक्स लौटा दे मुझे
आइने मुझ से मिरा पैकर न माँग

जिन को नींदों की न हो चादर नसीब
उन से ख़्वाबों का हसीं बिस्तर न माँग