उर्दू शायरी · ग़ज़ल

barf si raat ye masum kunwari baaten

बर्फ़ सी रात ये मासूम कुँवारी बातें

برف سی رات یہ معصوم کنواری باتیں

शायर: Tahir Faraz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बर्फ़ सी रात ये मासूम कुँवारी बातें
धूप उगते ही पिघल जाएँगी सारी बातें

मुँह को तकती रहीं बे-लफ़्ज़ हमारी बातें
और वो तंज़ से भरपूर तुम्हारी बातें

उस ने हालाँकि तग़ाफ़ुल से बहुत काम लिया
फिर भी पलकों के दिए कह गए सारी बातें

तोड़ सकती हैं तबस्सुम की तिलिस्मी ज़ंजीर
एक लुटते हुए एहसास की मारी बातें

टूटते लफ़्ज़ थे होंटों की मुंडेरों पे 'फ़राज़'
साथ देतीं भी कहाँ तक थकी हारी बातें