उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mera faKHr-e-hayati aaj bhi kirdar hai mera

मिरा फ़ख़्र-ए-हयाती आज भी किरदार है मेरा

مرا فخر حیاتی آج بھی کردار ہے میرا

शायर: Raakesh ulfat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरा फ़ख़्र-ए-हयाती आज भी किरदार है मेरा
इसी नग से मुज़य्यन तुर्रा-ए-दस्तार है मेरा

कोई पूछे तो यूँ बनता है जैसे यार है मेरा
वो उस पल मुझ को भी लगता गले का हार है मेरा

समुंदर में उतर कर फ़र्श तक जाना ज़रूरी है
तुम्हें मालूम होगा कितना गहरा प्यार है मेरा

अभी फूलों के चेहरों पर तबस्सुम आएगा कैसे
अभी मायूसियों में मुब्तला गुलज़ार है मेरा

मुझे पहचानने वाले बहुत कुछ पूछ सकते हैं
बड़ी मुद्दत हुई छूटा हुआ बाज़ार है मेरा

मिरी सोहबत-पसंदी कम हुई है जानता हूँ मैं
अभी भी ज़ख़्म-ए-तन्हाई मगर नाचार है मेरा