उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mila hai kaisa tere eatibar ka mausam

मिला है कैसा तिरे ए'तिबार का मौसम

ملا ہے کیسا ترے اعتبار کا موسم

शायर: Ehsaan Ghaman8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिला है कैसा तिरे ए'तिबार का मौसम
कि जैसे चारों तरफ़ है बहार का मौसम

उतरती जाती हैं खेतों में याद की चिड़ियाँ
निखर रहा है मिरे सब्ज़ा-ज़ार का मौसम

कुछ ऐसे मौज-ए-सबा ने छुआ है गालों को
कि दिल में खिलने लगा बर्ग-ओ-बार का मौसम

नई रुतों में मलेंगे उसी जगह हम तुम
सँभाल रखना मिरे यार प्यार का मौसम

निखरती धूप थी उजले थे मेरे शाम-ओ-सहर
कहाँ से आया है गर्द-ओ-ग़ुबार का मौसम

अभी तो उजला है आँगन गुलाब ताज़ा हैं
गुज़र ही जाए न क़ौल-ओ-क़रार का मौसम

कुछ और कोंपलें फूटेंगी फूल आएँगे
नया नया है अभी शाख़-सार का मौसम

हर एक शाख़ पे चाँदी है खिल रही एहसान
गुलों पे आया है सोला-सिंघार का मौसम