उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main hairan tha manzar ki hairani par

मैं हैरान था मंज़र की हैरानी पर

میں حیران تھا منظر کی حیرانی پر

शायर: Ehsaan Ghaman6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं हैरान था मंज़र की हैरानी पर
फूल खिले थे बहते हुए जब पानी पर

मेरे कपड़े देख के मिट्टी बोल पड़ी
घास उगाओ मेरी भी उर्यानी पर

मैं ने तेरा नाम लिखा जब तारों पर
चाँद हँसा था मेरी इस नादानी पर

याद करो जिस रात इकट्ठे बैठे थे
घंटों बात चली थी रात की रानी पर

देखे हैं कुछ देखे भाले लोग यहाँ
किस ने घर आबाद किया वीरानी पर

मैं ने इक सज्दे में रात गुज़ारी है
यूँ ही नहीं ये चाँद बना पेशानी पर