उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere kandhon pe rahe karte rahe sunwai

मेरे काँधों पे रहे करते रहे सुनवाई

میرے کاندھوں پے رہے کرتے رہے سنوائی

शायर: Nadim Nadeem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरे काँधों पे रहे करते रहे सुनवाई
पर फ़रिश्तों ने मिरी बात नहीं पहुँचाई

दौड़ती हाँपती आई थी उदासी मुझ तक
मेरे सीने से लगी और ज़रा सुस्ताई

ज़िंदगी थक नहीं सकती है कि चलना है इसे
दर-ब-दर घूमती रहती है मिरी ठुकराई

आइना बस वो दिखाता है जो हम चाहते हैं
और हम कब ही दिखाते हैं इसे सच्चाई

दो ख़ला एक बराबर हैं मिरे सीने में
जबकि मुमकिन ही नहीं एक की भी भरपाई

रोने वालो ज़रा आवाज़ को नीचा रक्खो
क्या मज़ा आएगा आवाज़ अगर भर्राई

एक हम ख़ुद के हैं इक घर के हैं इक दुनिया के
तुम अगर पा भी सकोगे तो हमें चौथाई