उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere aansu teri aankhon se agar mil jaen

मेरे आँसू तिरी आँखों से अगर मिल जाएँ

میرے آنسو تری آنکھوں سے اگر مل جائیں

शायर: Tahir Faraz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरे आँसू तिरी आँखों से अगर मिल जाएँ
जितने मुरझाए हुए फूल हैं सब खिल जाएँ

साँस लेना मुझे आसान भी हो सकता है
टहनियाँ पेड़ की धीरे से अगर हिल जाएँ

एक इक कर के सभी बस्तियाँ वीरान हुईं
क़त्ल करने के लिए अब कहाँ क़ातिल जाएँ

ढूँढती रहती हैं हर वक़्त ये आँखें उस को
किसी बाज़ार से गुज़रें किसी महफ़िल जाएँ

ख़ामुशी इतनी भी अच्छी नहीं होती 'ताहिर'
मुझ को डर है न कहीं होंट तिरे सिल जाएँ