उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mera sar Takra raha hai phir nai diwar se

मेरा सर टकरा रहा है फिर नई दीवार से

میرا سر ٹکرا رہا ہے پھر نئی دیوار سے

शायर: Faisal Tufail6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरा सर टकरा रहा है फिर नई दीवार से
जबकि आगे बढ़ गया था आख़िरी दीवार से

साया-ए-दीवार से सब मुतमइन हैं मैं नहीं
रौशनी में हो रही है कुछ कमी दीवार से

वो तिरी तस्वीर थी जो राब्ता बढ़ता गया
वर्ना क्यों करने लगा मैं दोस्ती दीवार से

कुछ गले तस्वीर से थे रात मैं ने कर दिए
हर तरफ़ से रिस रही है अब नमी दीवार से

तिलमिलाहट दीदनी थी चंद चेहरों पर वहाँ
कुछ पुराने दर मिले जब इक नई दीवार से

मैं बताऊँगा तुझे अब रास्ते का रोकना
तेरा अब तक सामना था रेत की दीवार से