उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mazhaka aao uDaen ishq-e-be-buniyaad ka

मज़हका आओ उड़ाएँ इश्क़-ए-बे-बुनियाद का

مضحکہ آؤ اڑائیں عشق بے بنیاد کا

शायर: Hafeez Jalandhari9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मज़हका आओ उड़ाएँ इश्क़-ए-बे-बुनियाद का
इक जुदा मदफ़न बनाएँ तेशा-ए-फ़रहाद का

वाह-वाह क्या रंग बदला गुलशन-ए-ईजाद का
साया-ए-गुल पर गुमाँ होने लगा सय्याद का

बह चला है अश्क-ए-हसरत अल-मदद ऐ बर्क़-ए-यास
ये भी इक दाना है मेरे ख़िर्मन-ए-बर्बाद का

किस निगाह-ए-गर्म से देखा है उस ने वक़्त क़त्ल
आह ठंडी पड़ गई दम घुट गया फ़रियाद का

ग़ुंचा ग़ुंचा ख़ौफ़ से मुझ को नज़र आया क़फ़स
पत्ते पत्ते पर हुआ धोका कफ़-ए-सैय्याद का

ये समझ लीजे किसी शा'इर के दिल का टूटना
टूट जाना है तिलिस्म-ए-आलम-ए-ईजाद का

हो न एहसास-ए-असीरी तो रिहाई है मुहाल
ऐसे क़ैदी नाम तक लेते नहीं मीआ'द का

ज़ो'फ़ की ये हिम्मतें हैं ना-तवानी का ये ज़ोर
टुकड़े टुकड़े कर दिया दामन मिरी फ़रियाद का

उस सुख़नवर से मुझे फ़ैज़-ए-सुख़न है ऐ 'हफ़ीज़'
नाम-ए-नामी है गिरामी जिस जहाँ उस्ताद का